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सेना ने ली 43 बच्चों की जान, मजलूमों पर जुल्म का परिणाम भुगत रहा है म्यांमार

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सेना ने ली 43 बच्चों की जान, मजलूमों पर जुल्म का परिणाम भुगत रहा है म्यांमार

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– सेना ने ली 43 बच्चों की जान, मजलूमों पर जुल्म का परिणाम भुगत रहा है म्यांमार

म्यांमार में सबसे बड़े जातीय समूह बर्मन या बर्मार के लोगों का प्रभुत्व रहा है । साथ ही इस देश मे भी अल्पसंख्यक समुदाय, जिन्हे हम रोहिन्ग्या मुस्लिम कहते हैं, हाशिये पर रहा ।




जनवरी 2009 में थाइलैंड ने अपने तट पर पहुंचे सैकड़ों रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेज दिया । लेकिन म्यांमार ने अपने यहां अल्पसंख्यकों के अस्तित्व को ही नकार दिया । तब से आज तक रोहिन्ग्या दर दर की ठोकरें खा रहे हैं ।




और आज ये जो लोग मर रहे हैं न किसी समय ये भी हमारे देश के बहुसंख्यकों की तरह अल्पसंख्यक मुस्लिम को मारने भगाने पर खुश होते थे । वक़्त बदल गया, आज इनका नम्बर आया है ।जब इनका नम्बर आया तो लोकतंत्र और प्रजातंत्र की मांग कर रहे हैं ।




कुछ भी कहो । आज म्यांमार को देखकर लग रहा है कि सच मे इतिहास खुद को दोहराता है और सबका नम्बर आता है । आज पूरा म्यांमार अल्पसंख्यकों की आहों की कीमत चुका रहा है ।हो सके तो सोचिएगा और सबक लीजियेगा इससे, वर्ना मुल्ला ज्ञान दे गया कहकर आगे गुज़रजना ।

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